क्या बात करूं....
क्या बात करूँ मैं लोगो की
सब आप बताये बैठे है
कुछ दर्द छुपाये बैठे है
कुछ ख़्वाब छुपाये बैठे है
कुछ हस्ते है ऊपर ऊपर
कुछ रोते है नकली नकली
कुछ बातें ऐसे करते है
संसार चलाये बैठे है
सच झूठ किसी की बातों का
कुछ पता नहीं चलता अब तो
कुछ के सच भी अब झूठ लगे
कुछ झूठ चलाये बैठे है
ख्वाबों का पर्दा यहाँ पर अब
बंद सा है खुलता ही नहीं
संसार समाज सभी अपने
अधिकार बताये बैठे है
इस दुनिया में अगर कुछ करना है
अपनी मर्ज़ी की करना तू
हो सफल अगर तो बात ही क्या
पर न हो तो मत डरना तू
बस चलता जा तू सही डगर
और पीछे कभी न मुड़ना तू
जब पहुंचेगा तू मज़िल पर
वो बात अलग ही सी होगी
तुझसे मिलने को सब “वोह ” लोग
कतार लगाये बैठे है
Comments
Post a Comment